मुख्य सामग्रीवर वगळा

तृष्णा

तृष्णा
                       =======
     एक व्यापारी था, वह ट्रक में चावल के बोरे लिए जा रहा था। एक बोरा खिसक कर गिर गया। कुछ चीटियां आयीं 10-20 दाने ले गयीं, कुछ चूहे आये 100-50 ग्राम खाये और चले गये, कुछ पक्षी आये थोड़ा खाकर उड़ गये, कुछ गायें आयीं 2-3 किलो खाकर चली गयीं, एक मनुष्य आया और वह पूरा बोरा ही उठा ले गया।
        अन्य प्राणी पेट के लिए जीते हैं, लेकिन मनुष्य तृष्णा में जीता है। इसीलिए इसके पास सब कुछ होते हुए भी यह सर्वाधिक दुखी है।
        आवश्यकता के बाद इच्छा को रोकें, अन्यथा यह अनियंत्रित बढ़ती ही जायेगी, और दुख का कारण बनेगी।✍🏻

 चौराहे पर खड़ी जिंदगी,
नजरें दौड़ाती हैं... 👀
काश कोई बोर्ड दिख जाए
जिस पर लिखा हो... ✍🏻😌🙏🏻

                      "सुकून..
                     0. कि.मी."

टिप्पण्या

या ब्लॉगवरील लोकप्रिय पोस्ट

जोपर्यंत दगडाच्या देवाला देणगी दिली जाईल तोपर्यंत उपासमारीने मारणाऱ्या गरिबांची संख्या कमी होणार नाही. माणसाला माणसात देव दिसला तरच ह्या पृथ्वीवर स्वर्ग अवतरेल आणि आपण चांगली संस्कृती रुजवू शकू. आज एकीकडे उपासमारी तर दुसरीकडे प्रचंड संपत्ती हि विसंगती दिसून येते. काही लोकांना पोटाची खळगी भरण्यासाठी दिवसभर काबाडकष्ट करावे लागतात तर काही लोक सात पिढ्या बसून खातील इतके कमावून बसलेले आहेत परंतु ते पोटभर खावू शकत नाहीत.
💐💐 तीन गाळण्या 🍀🍀 सौक्रेटीस हा एक महान ग्रीक तत्ववेत्ता होता . एके दिवशी त्याच्याकडे एकजण आला व त्याला सांगू लागला ,  " अहो ....तुमच्या मित्राबद्दल मी आताच काय ऐकले ? तुम्हास म...
अपनी भारत की संस्कृति को पहचाने. ज्यादा से ज्यादा लोगो तक पहुचाये. खासकर अपने बच्चो को बताए क्योकि ये बात उन्हें कोई नहीं बताएगा... 📜😇  दो पक्ष- कृष्ण पक्ष , शुक्ल पक्ष ! 📜😇  त...